Wednesday, April 6, 2016

सपनों की बरसात


वो मध्धम सी बरसात, वो भीगी भीगी रात
याद है आज भी मुझे, हमारी पहली मुलाक़ात

वो समाँ ही कुछ और था, मदमस्त अनोखा दौर था
आँखों में डूबी थीं आँखें, सिवा तुम्हारे ना कोई और था

वो जन्नत सा हसीं चेहेरा, ज़ूलफें वो तेरी रेशम सी
नज़रों में चमकता वो काजल, गालों की मेहेक शीशम सी

चाहत थी मेरी बस इतनी, की होता रहे दीदार तेरा
आए ना अब कब जुदाई तुझसे, साथ रहे हर पल साथ तेरा

उस रात से लेकर आज तक, लम्हे बीते अरसे बीते
तेरी याद में तन्हाई में हम, हँसकर अपने आँसू पीते

इस दिल को ना कभी समझा सके, की सच ऩहीँ था वो सपना
पास होकर भी लगता था दूर, पल में पराया पल में अपना

हर रात अब तेरी याद में, करते अब वही एक बात
आ जे फिर तू सामने, हो जाए फिर वही सपनों की बरसात


- अंशुल नागोरी


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