ये
बात तो बिल्कुल ग़लत है
की
यूँ ही एक दिन आप चले जा रहे हो
सोचा
था बिताएँगे कुछ और पल साथ मिलकर
पर
आप हो जो इन पलों को ही साथ ले जा रहे हो
गिरेबान
फ़िक्र का छोड़ कर
हँसी
को गले से लगाया हमने
खुद
को भूलने की फिराक़ में
ज़िंदादिली
को जीने में मिलाया हमने
इस
पर ये बात कितनी ग़लत है
की
यूँ ही एक दिन आप चले जा रहे हो
यादें
जो आज तक आज हुआ करती थीं
कल
से वो हमेशा के लिए कल बन जाएँगी
पर
यकीं है इतना की याद आएँगी वो जब
इन
गालों में ख़ुशियों के सल बन जाएँगी
अब
बताओ... ये बात कितनी ग़लत है
की
यूँ ही एक दिन आप चले जा रहा हो
अब
तो बस ख़यालों में एक ख़्वाहिश है खोई सी
मौज
के फव्वारे में एक फरमाइश है भिगोई सी
की
आज तो आपको जाने से हम रोक नहीं पाएँगे
पर
लेते हैं ये वादा की
ये
मस्ती भरे पल हम फिर जीएँगे
ये
सुहानी यादें हम फिर दोहराएँगे...
-
अंशुल नागोरी
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