Wednesday, April 6, 2016

ये बात तो बिल्कुल ग़लत है


ये बात तो बिल्कुल ग़लत है
की यूँ ही एक दिन आप चले जा रहे हो
सोचा था बिताएँगे कुछ और पल साथ मिलकर
पर आप हो जो इन पलों को ही साथ ले जा रहे हो

गिरेबान फ़िक्र का छोड़ कर
हँसी को गले से लगाया हमने
खुद को भूलने की फिराक़ में
ज़िंदादिली को जीने में मिलाया हमने

इस पर ये बात कितनी ग़लत है
की यूँ ही एक दिन आप चले जा रहे हो

यादें जो आज तक आज हुआ करती थीं
कल से वो हमेशा के लिए कल बन जाएँगी
पर यकीं है इतना की याद आएँगी वो जब
इन गालों में ख़ुशियों के सल बन जाएँगी

अब बताओ... ये बात कितनी ग़लत है
की यूँ ही एक दिन आप चले जा रहा हो

अब तो बस ख़यालों में एक ख़्वाहिश है खोई सी
मौज के फव्वारे में एक फरमाइश है भिगोई सी
की आज तो आपको जाने से हम रोक नहीं पाएँगे
पर लेते हैं ये वादा की
ये मस्ती भरे पल हम फिर जीएँगे
ये सुहानी यादें हम फिर दोहराएँगे...

- अंशुल नागोरी


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